Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 30, 2011

युगों बहता


ये मेरी भावनाएँ 

1.मेरी हँसी :

मैं हँसती हूँ

एक विरोध मेरा

इसी रूप में

 2.मेरा रोना :

 आँखों में नमीं 

न नमकीन पानी

पी लेती घूँट

 3.मेरी मुस्कान :

अल्लहड़ -सी

बेरोकटोक आती

खिलता रूप

 4-मेरा क्रोध :

तड़ित सम

शिष्टता की सीमा में 

चमका -बुझा

5-प्रेम :

1

पारदर्शी– सा 

पवित्र, समर्पित

युगों बहता

2

लता -सा झुका,

लिपटा भयभीत

कोमल, शुद्ध !

-0-

डॉ नूतन डिमरी गैरोला

 

मेघ बनके

1

नैनों मे  आग

अधरों पर ओस

मानव ही है

2

दोस्ती की बात

आज के युग में ज्यों

दिन में रात

3

रूठी क्यों धूप –

कच्चे घरों से , पूछो

ये महलों से

4

कटे जो वृक्ष

रोती हैं नदियाँ भी

बाढ़ स्वरूप

5

बड़े शहर

प्रगति के नाम पे

बाँटे ज़हर

6

मुस्कुराता है

आईना जब-जब

आदमी रोता

7

रोटी चाँद जो

बन जाए तो फिर

इंसाँ क्या खाए  ?

8

इस राह पे

सँभलकर चलो

बिछे हैं काँटे

9

चिड़िया बोली

चूँ -चूँ -चूँ, जंगल है

जलता धू-धू

10

मेघ बनके

याद तेरी आ गई

जी पे छा गई

11

बारिश से क्या

मुझे हिज़्र की आग

है  प्रेम-राग

12

चन्द्र-विहीन

नभ जैसे , मैं तेरे

बिन , हूँ वैसे ।

13

रात , चाँद , तू

दिल करे भला क्या

और जुस्तज़ू

14

ॠतु  के नाम

घटा ने भर दिये

आँखों के जाम

15

सच कहके

दु:ख सहके हम

ज़िन्दा क्या कम

16

तूने छूकर

मुझको महकाया

दिल खिलाया

-0-

जया नर्गिस : भोपाल

 


Responses

  1. Dhanvyaad in haiku ke liye .. inhe sthan diya..

  2. Dhanvyaad in haiku ke liye .. inhe sthan diya….aur jaya ji ke haiku bhi umda..

  3. Dr.Nutan Gairola Ji aur Jaya Nargis Ji ke haiku bahut achchey lage. Bahut bahut badhai

  4. मैं हँसती हूँ
    एक विरोध मेरा
    इसी रूप में
    bahut gahre bhav yadi inke bhavon ko vistar diya jaye to pura ghr bhar jaye
    तड़ित सम
    शिष्टता की सीमा में
    चमका -बुझा
    krodh ka bhut sunder chitran
    rachana

  5. बारिश से क्या
    मुझे हिज़्र की आग
    है प्रेम-राग
    sunder haiku

    सच कहके
    दु:ख सहके हम
    ज़िन्दा क्या कम
    ji hai bahut badi baat hai
    sabhi haiku bahut uttam hai
    rachana

  6. मैं हँसती हूँ
    एक विरोध मेरा
    इसी रुप में
    -गागर में सागर जैसा भाव समेटा है।
    कटे हैं वृक्ष
    रोती हैं नदियाँ भी
    बाढ़ स्वरुप
    पर्यावरण पर सुन्दर हाइकु

  7. मैं हँसती हूँ
    एक विरोध मेरा
    इसी रूप में

    पारदर्शी- सा
    पवित्र, समर्पित
    युगों बहता
    Dr. Nutan ji, aapke sabhi haaiku achche lage lekin ye do aur bhi adhik man ko bhaaye….badhaai…

    Dr. Rama Dwivedi

  8. मैं हँसती हूँ
    एक विरोध मेरा
    इसी रूप में

    पारदर्शी- सा
    पवित्र, समर्पित
    युगों बहता
    Dr. Nutan ji, aapke sabhi haaiku achche lage lekin ye do aur bhi adhik man ko bhaaye….badhaai…

    रूठी क्यों धूप –
    कच्चे घरों से , पूछो
    ये महलों से

    कटे जो वृक्ष
    रोती हैं नदियाँ भी
    बाढ़ स्वरूप

    Jaya ji, aapke abhi haiku sundar hai par ye do mujhe jyada achche lage….badhai ….

    Dr. Rama Dwivedi

  9. मेरी मुस्कान :
    अल्लहड़ -सी
    बेरोकटोक आती
    खिलता रूप
    बहुत सुन्दर नूतन जी को बधाई। जया जी का 14 वं हाइकु अच्छा लगा
    कुछ हाइकु अभी और मेहनत माँगते हैं जैसे 3 न, और सात नम्बर वाला । धन्यवाद।

  10. आप सभी की यह टिप्पणी पढ़ कर मन भावविवहल हो गया …आप सभी का आभार …ये टिप्पणियां मेरे लिए प्रोत्साहन है… रामेश्वर जी का भी धन्यवाद और हरदीप जी का भी ..जिन्होंने हमें इस मंच पर जगह दी … सादर

  11. sach sbhi acche lge…


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