Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 30, 2011

कुछ पल खुशी के


1

झरोखे बैठी

आँगन की चिरैया

पंखों को तोले।

2

गौरैया प्यारी

बसो इसी अँगना

खो न जाना

3

जी लूँगी मैं

कुछ पल खुशी के

तू जो फ़ुदके

4

पीपल कहे-

जल्दी आना बिटिया

राह तकूँ मैं

5

चुप -चुप है

क्यों बरगद बाबा

दाढ़ी है बढ़ी

6

गुलमोहर

सँभाले सुर्ख साड़ी

गिरे पंखुड़ी

7

लिए हाथों में

कलियों का गुच्छा

खड़ा बुराँश

8

किल्लोल करे

बलखाती सरिता

रुकूँ ना कभी

9

पहाड़ी राहें

ये सर्पीली सड़कें

दिल धड़के

10

ठंडी हवाएँ

चेहरा छू के कहे

मैं संग तेरे

11

हंसा-बादल

गगन -सरोवर

पंछी हैं नैन।

12

नन्हा सा पौधा

उगा है चट्टान में

आस जगाए

13

नेह -बन्धन

कभी टूटे ना यह

माँगू मैं दुआ

14

जाऊँगी कहाँ

कौन मेरा अपना

तुम्हारे सिवा

-0-

ताँका

 भावों के दीप

यूँ.ही जलते रहें

मन – देहरी ,

 जगमग  रौशन

 जहाँ हो तुम्हारा

-कमला निखुर्पा

-0- 

मेघों की कूँची

१.

मेघ गरजा

टिप -टिप बरसा

मन हरषा

२.

पानी बरसा

सोंधी खुशबू उड़ी

धरती धुली

३..

वन में मोर

घटाएँ घनघोर

भावविभोर

४.

घटा है आती

बिजली चमकाती

शोर मचाती

५.

सह न सका

वाष्पकणों का बोझ

बरसा मेघ

६.

बहती धारा

सजाई बालकों ने

कागज़ी नाव

७.

प्रथम बूँद

आम की डाल पर

क्यों भूले पेंगे

 ८.

मेघों की कूँची

आकाश कैनवास

उकेरे चित्र

      ९.

ऋतु सावन

शंकर-सा पावन

हुलसा मन

१०.

हरी चूड़ियाँ

खनकी कलाइयाँ

सावन आया

११.

अम्बर -धरा

बँधे एक सूत्र में

बरसात में

१२.

छतरी तनी

नभ -धरा के बीच

नया आकाश

१३..

बारिश आती

महावर रचाती

गोरी शर्माती

१४.

भरे पोखर

मेढक टर- टर

गूँजा शहर

१५.

बारिश रुकी

पत्तों ने टपकाए

बूँद के मोती

१६.

दूर क्षितिज़

सतरंगी चुनर

इन्द्रधनुष

-0-

ॠता शेखर मधु 

 


Responses

  1. नन्हा सा पौधा
    उगा है चट्टान में
    आस जगाए…

    Bahut sunadar…

  2. पानी बरसा
    सोंधी खुशबू उड़ी
    धरती धुली…
    Khubsurat….

  3. rim jhim sa excellent observation and expression

  4. Rita Shekhar ‘Madhu Ji
    Aap ki meghon ki kucchi ke antargat ye haiku
    bahut scientific hai.

    सह न सका
    वाष्पकणों का बोझ
    बरसा मेघ

    मेघों की कूची
    आकाश केनवास
    उकेरे चित्र|

    भरे पोखर
    मेढक टर टर
    गूंजा शहर|

  5. Nikhurpa ji
    जी लूँगी मैं भी
    कुछ पल खुशी के
    तू जो फुदके
    nanhi bitiya ki yaad dilati hai.

  6. पीपल कहे-
    जल्दी आना बिटिया
    राह तकूँ मैं
    ati sunder

    नन्हा सा पौधा
    उगा है चट्टान में
    आस जगाए
    sunder bhav
    rachana

  7. barish pr bahut sunder haiku hai man ko bhigote se

    मेघों की कूँची
    आकाश कैनवास
    उकेरे चित्र

    दूर क्षितिज़
    सतरंगी चुनर
    इन्द्रधनुष
    bahut khub
    rachana

  8. लूँगी मैं
    कुछ पल खुशी के
    तू जो फ़ुदके
    Aas ka daaman koi chode bhi to kyon. Bahut hi udti hui parvaaz kle liye daad

  9. कमला निखुर्पा जी,
    ऋतु पर आधारित सभी हाइकु बहुत ही मनमोहक लगे….बहुत सारी बधाई..

    ऋता शेखर मधु जी,
    पावस ऋतु पर आद्धृत सभी हाइकु बहुत -बहुत सुन्दर व सार्थक हैं …..साधुवाद व शुभकामनाएँ…
    डा. रमा द्विवेदी

  10. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे। कम्बोज भाइ आपने जो हाइकु विधा के प्रचार प्रसार के लिये यत्न किये हैं वो सराहणीय हैं। मुझे लगता है कि आने वाले दिनो मे हर ब्लाग पर हाइकु की धूम होगी। बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें।

  11. बेहतर…

  12. उत्साहवर्धन के लिए आप सबको
    बहुत बहुत धन्यवाद|
    यहां पर स्थान देने के लिए
    रामेश्वर काम्बोज’हिमांशु’ सर एवं
    डा हरदीप संधु जी को बहुत- बहुत
    धन्यवाद |

  13. वर्षा ऋतु बहुत खूबसूरती से संक्षेप में वर्णित हैं


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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