Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 18, 2011

ओ मेरे मन !


1

सूरज कल

खींचेगा नई रेखा

चल सँभल

2

एकाकीपन

डँसता हर छिन

बासुकि बन

3

एकाकीपन

निष्ठुर निर्वासन

हो न सहन

4

करो ग्रहण

अश्रु का आचमन

प्रसन्न मन

5

ओ मेरे मन !

फटक भोथरापन

सूप-सा बन

6

बीत गया जो

करो न याद उसे

आज में जियो

-0-

  पुष्पा रघु,   [जन्म -1 अप्रैल 1939 ]

27 ए , सेक्टर -1, चिरंजीव विहार , गाज़ियाबाद-201002 (उ प्र) दूरभाष-0120-5573003

Responses

  1. सुन्दर हाइकू. सूरज खींचेगा कल नयी रेखा… आज में जियो… बहुत ही सकारात्मक सोच है…

  2. बीत गया जो
    करो न याद उसे
    आज में जियो
    sunder vicar ,behtrin haaiku


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