Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 9, 2011

बिना प्यार के


डॉ भावना कुँअर नई पीढ़ी की वह हाइकुकार  है , जिसने इस विधा को नई ऊँचाई दी है । इनके सर्जनात्मक लेखन को केवल प्रवासी हाइकुकार कहकर सीमित नहीं किया जा सकता । विभिन्न आस्वाद के 17 हाइकु दिए जा रहे हैं ; जो पाठकों को अवश्य रससिक्त करेंगे। सम्पादक

1

प्रेम की सीढ़ी

झूठ की दीवार पे

कभी ना चढ़ी ।

2

मुख पे तेरे

चाँदनी की ओढ़नी

चाँद की नथ

3

हवा जो आई

परदेसी लौट आ

संदेशा लाई ।

4

प्यासा सागर

सर्द हुआ सूरज

चॉंद झुलसा ।

5

यूँ मुश्किल है

बनाना आशियाना

बिना प्यार के

6

जब भी मिली

सफ़र में तो हमें

धूप ही मिली ।

7

दुखों की मेरे

आधियॉं जब चली

जीना दुश्वार

8

शान्त समुद्र

मचलती लहरें

किनारें पर ।

9

बाँधे हुए हैं

मधुरता रिश्तों की

वो है बंधन ।

10

समाए दु:ख

है अथाह सागर

दिल तुम्हारा।

11

रहें खुशियाँ

दामन को आपके

महकाती सी।

12

सुबक पड़ी

कैसी थी वो निष्ठुर

विदा की घड़ी।

13

था मन मेरा

उन्मुक्त पंछी जैसा

जाल में घिरा।

14

बुरी बहुत

जमाने की नज़र

खुद को बचा ।

15

नन्हीं तितली

बुरी फँसी जाल में

नोंच ली गयी।

16

जूही की कली

बाबुल के घर से

विदा हो जली।

17

हुआ मुश्किल

आबरू बचाना भी

दरिंदा जहाँ।

-0-

भावना कुँअर ,सिडनी ( आस्ट्रेलिया)


Responses

  1. 1. प्रेम की सीढ़ी, झूठ की ….
    5. यूँ मुश्किल है, बनाना….
    10. समाए दु:ख, है अथाह….
    11. रहें खुशियाँ, दामन को….
    कई बार पढ़े

  2. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक हैं… चंद शब्दों में भावना जी ने बहुत कुछ कह दिया है
    हवा जो आई
    परदेसी लौट आ
    संदेशा लाई ।
    इस हाइकु के भाव परदेस में रहने वाले ही दिल में उतार सकते हैं…देस के दिनों की यादें उन को हरदम सताती रह्ती हैं!
    जब भी मिली
    सफ़र में तो हमें
    धूप ही मिली ।
    जीवन का आईना दिखलाता यह हाइकु !

  3. आभार…

  4. सभी हाईकु बहुत अच्छी मगर 1,3, 6 10 11 ये तो बहुत ही अच्छे लगे\ भावना जी को बधाई।

  5. नन्हीं तितली
    बुरी फँसी जाल में
    नोंच ली गयी।

    जूही की कली
    बाबुल के घर से
    विदा हो जली।

    इतनी भावपूर्ण, मन में गहरे तक उतर जाने वाली मार्मिक प्रस्तुति के लिए मेरी बहुत बधाई…।

  6. sabhi haaiku mein jivan ke sabhi bhaav, bahut sundar, badhai.

  7. ek se badhkar ek hain sare haaiku
    kisi ek ki tarif doosre se anyay hoga

    bdhaai ho

  8. भावना जी के सभी हाइकु सार्थक एवं संप्रेषणीय हैं…..शुभकामनाओं सहित…

  9. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक है. रचयिता और प्रस्तुतकर्ता दोनों बधाई के पात्र है।

  10. bhavna ji kya sunder likha hai bhavon ka vistar sunder vistar hai.

    था मन मेरा
    उन्मुक्त पंछी जैसा
    जाल में घिरा।
    प्रेम की सीढ़ी
    झूठ की दीवार पे
    कभी ना चढ़ी ।
    ati sunder ek se badh ke ek
    badhai
    rachana


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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