Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 8, 2011

चाहत मेरी


1.

आँखों में आँसू

दिल मेरा बेचैन

कारण तू है!

2.

तुम्हें पा लिया

अब क्या पाना बाकी

तुम्हीं बताओ ?

3.

तेरा हो जाऊँ

मैं तन से , मन से

और क्या चाहूँ ?

4.

तुझको पा लूँ

खुद को मिटा डालूँ

चाहत मेरी !

5.

सर्दी में धूप

वैसे ही सुहाती है

जैसे तू मुझे !

6.

मैं कुछ नहीं

मेरा कुछ भी नहीं

बस तू ही तू !

-0-

दिलबाग  विर्क


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Responses

  1. प्रेम-रस में पगे बहुत ही मर्मस्पर्शी हाइकु !

  2. मैं कुछ नहीं
    मेरा कुछ भी नहीं
    बस तू ही तू !
    हाइकु में यह सूफ़ियाना अन्दाज़ भा गया…। मेरी बधाई…।

  3. प्रेम -भाव से परिपूर्ण सभी हाइकु ….. बधाई….

  4. सर्दी में धूप
    वैसे ही सुहाती है
    जैसे तू मुझे !
    6.
    मैं कुछ नहीं
    मेरा कुछ भी नहीं
    बस तू ही तू !
    prem aur samarpan ka sunder chitran
    badhai
    rachana


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