Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 31, 2011

मूक वृक्ष


1

डाल कटी तो

मरी संवेदनाएँ,

मूक वृक्ष की

2

उड़ो परिन्दो !

चीर कर रख दो

आसमान को

3

सहिष्णुता ही

ल लदे वृक्ष की,

पहचान है

4

आग लगी है,

फूलों ने पत्तो को ही

जला दिया  है

5

कैद करती,

इंद्रधनुषी रंग,

हठीली ओस

-0-

अंशु सिंह

Advertisements

Responses

  1. बहुत सुन्दर हाइकु हैं…। मूक प्रकृति को अंशु जी ने मानो ज़बान दे दी…।
    मेरी बधाई…।

  2. डाल कटी तो / मरी संवेदनाएँ, मूक वृक्ष की
    उड़ो परिन्दो !/चीर कर रख दो /आसमान को

    प्रकृति की संवेदनाओं को व्यक्त करते हुये हाइकू… बधाई हो अंशु जी… बहुत ही सुन्दर रचना …

  3. सभी रचना बहुत प्यारी.. !

    उड़ो परिन्दो !
    चीर कर रख दो
    आसमान को

    बहुत गहरा.. !


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: