Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 23, 2011

मन का पंछी


1

भीगते रहे

बरसात में हम

प्यासा है मन ।

2

व्यथा तुम्हारी

कचोटती है कहीं

मेरा अन्तर ।

3

आँसू तुम्हारे

गिरे मेरी आँखों से

मिटे हैं गिले ।

4

अन्तिम साँझ

पर है इन्तज़ार

मुझे तुम्हारा ।

5

साँझ  ढलते

जल गए दीपक

तेरी यादों के ।

6

अकेलापन

तोड़ता तन -मन

आ साथी बन ।

7

हर टहनी

जीवन से भरी थी

काट दी  मैंने ।

8

मन का पंछी

थक गया उड़ते

उतर नीचे ।

9

अधरों पर

फूलों-सी मुसकान

खींचती मन ।

10

नहीं बरसा

आसमान से पानी

मन तरसा ।

-0-

सुदर्शन रत्नाकर


Responses

  1. सुदर्शन जी के सभी हाइकु बहुत अच्छे हैं, मुझे खास तौर पर ये बहुत पसंद आए-

    भीगते रहे /बरसात में हम/प्यासा है मन ।

    व्यथा तुम्हारी/कचोटती है कहीं/मेरा अन्तर ।

    आँसू तुम्हारे/गिरे मेरी आँखों से/मिटे हैं गिले ।

    इसे पढ़ कर तो बहुत पहले पढ़ी एक कविता याद आ गयी. शायद पंडित रमानाथ अवस्थी जी की है… ठीक- ठीक तो शब्द याद नहीं, लेकिन भाव कुछ ऐसे थे… “तेरे प्यार का कुछ ऐसा असर हो मुझ पर, मेरा आँसू तेरी पलकों से उठाया जाये, मै रहूँ भूखा तो तुझसे भी ना खाया जाये.”

  2. सुदर्शन रत्नाकार जी के हाइकु पढ कर मन आनन्द से भर गया। लगा-जैसे अलग अलग हाइकु नही एक धारा प्रवाह कविता ही पढ रही हूँ।
    अन्तिम साँझ—
    हर टहनी—\ अकेलापन —
    ये हाइकु दिल को छू गये। सुदर्शन जी को बहुत बहुत बधाई।

  3. सभी हाइकु अच्छे ; परन्तु गहराई इतनी नहीं, जितनी पहले के रचनाकारों में थी।

  4. आज मैं इस पृष्ठ पर प्रथम बार पर आई हूँ ! हाइकु को समर्पित अंतरजाल का यह पन्ना बहुत अच्छा लगा | अब यहाँ आना होगा और आपके इस पृष्ठ से कुछ और सीखने को मिलेगा … सादर धन्यवाद |
    डॉ नूतन डिमरी गैरोला http://amritras.blogspot.com

  5. सच है काटना जितना आसान है, उगाना उतना ही कठिन्…फ़िर भी हम बिना सोचे काट देते है…टहनी हो या कोई अच्छी बात या रिश्तों की डोर्… और मन की कसक कह उठती है…हर टहनी जीवन से भरी थी काट दी मैंने , सुन्दर भाव्…

  6. मन का पंछी
    थक गया उड़ते
    उतर नीचे ।
    sach kaha kabhi kabhi aesa hi hota hai
    आँसू तुम्हारे
    गिरे मेरी आँखों से
    मिटे हैं गिले ।
    aesa sneh man khushiyon se bhar gaya .
    sabhi hayku bahut amol baat kah rahe hain
    saader
    rachana

  7. मन पंछी के बिभिन्न पड़ाबों का खू्बसूरत अंदाज!
    सुधा भार्गव

  8. आँसू तुम्हारे
    गिरे मेरी आँखों से
    मिटे हैं गिले ।

    अन्तिम साँझ
    पर है इन्तज़ार
    मुझे तुम्हारा ।
    —–
    साँझ ढलते
    जल गए दीपक
    तेरी यादों के ।

    अच्छे भाव हैं, हालाँकि इतने कम शब्दों में भावों को व्यक्त करना मुश्किल होता है। आप ब्लॉग पर अच्छे हाइकू दे रहे हैं।

  9. डॉ नूतन जी आपके हाइकु की प्रतीक्षा रहेगी । डॉ हरदीप सन्धु

  10. यह मन का पक्षी गहरे कहीं जा बैठा। बहुत सुंदर हायकू। रचनाकार को बधाई।


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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