Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | नवम्बर 25, 2010

मै बाती हूँ


1
खुशी घर की
न तू से है न मै से
हम दोनो से

2
चलते जाना
कभी न रुकना तू
मंजिल तक

3
संघर्ष है
ये
जीवन खेल नही
कर्म
भी करो
4
कैसी है जिह्वा
जो सच ही न बोले
गूँगा
ही अच्छा
5
गर्व मुझे
है
मेरा देश महान
मेरी है शान
6
तुम आओ तो
दीप जलाऊँ सारे
राह निहारूँ

7

तुम दीपक

मै बाती हूँ तुम्हारी

जलेंगे संग।

 

-निर्मला कपिला


Responses

  1. हिमाँशू भाई बहुत बहुत धन्यवाद। आपकी शुभकामनायें मुझे याद रहेंगी। ये मेरे हाईकु का पहला सफर शुरू हुया है,अपके सौजन्य से। धन्यवाद।

  2. अगर यह निर्मला जी के हाइकू सफ़र की शुरुआत है तो…!!!
    बेहद खूबसूरत हाइकु…बधाई…।

  3. “हिंदी हाइकू” के लिये आप को बधाइयाँ.
    आज का समय ही हाइकू पढ़ने का है, जब की सभी के पास समय की कमी लगातार महसूस हो रही है.
    “क्या आप भी हाइकु लिखना चाहते हो ?” अपने आप में अभिनव प्रयोग है.
    आप को साधुवाद.
    अक्षय

  4. निर्मला जी की / हाइकु रचना ने / कमाल किया..
    आप तो यूं ही/ लिखती रहे सदा/ कामना मेरी/
    हिमांशु जी को / लख-लख बधाई/ सुंदर काम….
    भेजूँगा मैं भी/ अपनी रचनाए/ भविष्य में /
    इस ब्लॉग को / मिले लोकप्रियता/ शुभकामना/

  5. भाई गिरीश पंकज जी ! आपकी –
    हाइकुमय टिप्पणी मधु-घट बनके आई। बहुत कम जितनी भी दें हम
    आज बधाई !
    आप आएँगे
    हिन्दी हाइकु को भी
    खूब सजाएँगे।
    हम दोनों ही
    आपके हैं बहुत
    शुक्रगुज़ार ।
    -डॉ हरदीप
    रामेश्वर काम्बोज

  6. प्रियंका जी धन्यवाद।

  7. अक्षय जी धन्यवाद।

  8. गिरीश जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद। ये बधाई हिमाँशू भाई जी को दें। उनके उत्साहवर्द्धन से पहली बार हाईकु लिखा है। धन्यवाद।

  9. दीप और बाती संग संग जलकर प्रेम की पावन लौ से आलोकित कर रहे हैं।
    निर्मलाजी की सोच की ऊंचाई और भावों की गहराई को मेरा सलाम।

  10. खुशी घर की
    न तू से है न मै से
    हम दोनो से

    निर्मला जी गिने चुने शब्दों में आपने ज़िंदगी का फ़लसफा समझा दिया, ये ही तो कमाल है आपका और हाइकू विधा का.. मैंने आपकी और भी रचनाएँ पढ़ी हैं हमेशा ही सधे और सटीक शब्दों में भावोँ को व्यक्त करना आपकी विशेषता है.

  11. निर्मला कपिला जी के हाइकु मैं बड़े मनोयोग से पढ़ गया हूँ । उन्होंने इस विधा को बखूबी निभाया है । हार्दिक बधाई और शुभ कामना !
    .

  12. Aap ke haiku ke safar ka shubh-aarambh bahut accha laga. Hamari shubh kamna aap ke sath hai.

  13. बहुत सुन्दर हाइकु हैं…।
    खुशी घर की
    न तू से है न मै से
    हम दोनो से ।

    कितनी सटीक बात कह दी निर्मला जी ने…मेरी बधाई स्वीकारें…।

    मानी


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