Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | नवम्बर 15, 2010

प्रेम हमारा


1.प्रेम हमारा

नदी और सागर

जैसा ही रहे।

2.तन संसारी

चिर शापित मन

भटकेगा ही।

3. बजे सितार

मृदुल जीवन में

गूँजे तन में।

4.मरुथल में

मृग मरीचिकाएँ

किसे बताएँ।

5.जीवनगीत

निरर्थक सपने

देखे हमने।                                                                                                                                  -0-

नवीन चतुर्वेदी


Responses

  1. मरुथल में
    मृग मरीचिकाएँ
    किसे बताएँ

    बहुत सुन्दर.सभी हाइकू सार्थक हैं.

  2. 4.मरुथल में
    मृग मरीचिकाएँ
    किसे बताएँ
    kitna gahra bhav bhara
    .प्रेम हमारा
    नदी और सागर
    जैसा ही रहे।
    bahut sunder
    rachana

  3. मुझे विशेष पसंद नहीं आये. पता नहीं क्यों क्षमा कीजियेगा.

  4. अलग अनोखा अंदाज वो भी अर्थपूर्ण

  5. जीवन-गीत
    निरर्थक सपने
    देखे हमने।
    बहुत अच्छे लगे हाईकु। नवीन जी को बधाई।


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