Posted by: हरदीप कौर संधु | अक्टूबर 27, 2010

मन- हिरन


1- सोंधी खुशबू

माटी सा -बचपन

ढूँढे रे मन।

2- कस्तूरी तन

दौड़े मन- हिरन

जग कानन।

3-टूटा रे बाँध

कगार- बंध टूटे

निर्झर फ़ूटे।

कमला निखुर्पा


Responses

  1. कस्तूरी तन
    दौड़े मन- हिरन
    जग कानन

    बहुत सुन्दर ..

  2. – सोंधी खुशबू
    माटी सा -बचपन
    ढूँढे रे मन।
    BAHUT HI PYARA
    SABHI APNE AAP ME ACHCHHE HAI
    BADHAI
    RACHANA

  3. Sunder bhav
    Bikhre yahan par
    Mudit hum

  4. 2- कस्तूरी तन
    दौड़े मन- हिरन
    जग कानन।
    क्या बात है। बहुत खूब

  5. धन्यवाद, आपका उत्साहवर्धन प्रेरणास्पद है।

  6. बहुत बहुत धन्यवाद।

  7. कमला जी के हाइकु मन को छू लेते हैं । बहिन शैल जी ने तो टिप्पणी में एक खूबसूरत हाइकु कह दिया है- सुन्दर भाव /बिखरे यहाँ पर /मुदित हम ।


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