Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 23, 2010

यादों के मेले


यादों के मेले

हैं अब साथ तेरे

नहीं अकेले।

डॉ भावना कुँअर


Responses

  1. sunder ati sunder komal bhav
    badhai
    rachana

  2. bhut badia !

  3. भावों से लबरेज़ एवं शिल्प की कसौटी पर खरे भावना जी के इस हाइकु के लिए उन्हें बधाई .

    कुँवर कुसुमेश

  4. हाइकू जैसी संक्षिप्त रचना में इतनी सफलता से भाव व्यक्तकरना प्रशसनीय है

  5. Rachana ji, surjit ji,Kunwar ji, Girija ji aap sabka tahe dil se shukriya aapke sarahniy shbad mere liye amulya dharohar hain…aap sabki aabhari hun..


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