Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 13, 2010

बूढ़ी दादी


बूढ़ी दादी

आज भी पहचान

पूरे गाँव की

डॉ. सतीशराज पुष्करणा

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Responses

  1. बहुत बड़ी बात कह दी पुष्करणा जी ने , कम से कम शब्दों में ! आज यह पहचान हमारे स्वार्थों के कारण गुम होती जा रही है ।

  2. बहुत अच्छा लगा
    कुछ ऐसा ही

    कहाँ से लाऊं
    स्नेह से लबालब
    दादी सा मन


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