Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 1, 2012
रीता है मन
ग़ाफिल गोरी
जल चंचल
सूरज लाल
Posted in दीपिका रानी | Tags: उत्तर प्रदेश, गाज़ियाबाद, भारत
Posted by: रामेश्रर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 1, 2012
नींद खुमारी
रेणु चन्द्रा माथुर
1
नींद खुमारी
सपने सागर में
डूबते जाएँ ।
2
भोर सुहानी
सुनहरी किरणें
लेकर आई ।
3
सतरंगी हो
उड़ने लगा मन
पंख पसारे ।
4
बीच झील में
उतरी इठलाती
चाँदनी रात ।
5
फिर आएगी
अँधेरे को चीरती
उजली रात।
6
ले चली रात
झिलमिल तारों की
सजी बारात।
7
यों लगा मुझे
पर्वतों से घटाएँ
आ मिलीं गले।
8
नीम -निंबौरी
आम के टिकोरे -सा
अल्हड़पन ।
9
फैला उजाला
चाहों ने फिर घेरा
आशा का डेरा।
-0-
Posted in रेणु चन्द्रा माथुर | Tags: जयपुर, भारत, राजस्थान
Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 29, 2012
जिंदगी कुछ चित्र :
डॉ0सावित्री डागा ,जोधपुर
1
यह जिंदगी
पंखनुची चिड़िया
फड़फड़ाती ।
2
यह जिंदगी
किसी के लिए तीर
किसी को तुक्का ।
3
जिंदगी जैसे
एक लहजा छल
या समझौता ।
4
जिंदगी खुद
गीता -महाभारत
जीना जानो तो ।
5
यह जिंदगी
कैंसर के रोग-सी
मौत को जीना ।
6
यह जिंदगी
खुले हैं दरवाज़े
बँधे हैं पाँव ।
7
यह जिंदगी
सिर्फ समझौता है
या है लाचारी ।
8
जिंदगी अब
हँसना है न रोना
केवल ढोना ।
-0-
[ डॉ सावित्री डागा , जन्म 10 मार्च ; 1938,पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , जोधपुर , दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित ]
Posted in डॉ0सावित्री डागा | Tags: जोधपुर, भारत
Posted by: रामेश्रर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 29, 2012
फैले सुवास ।
1- डॉ क्रान्ति कुमार
1
आई गर्मी
हैं बौर लदे आम
फैले सुवास ।
2
कोकिल तान
है दे रही पैगाम
बोना मिठास
3
गुजरे वर्ष
हैं सतरंगी यादें
देतीं सम्बल।
4
आया प्रभात
कलरव सौगात
पुलके गात ।
5
कोकिल -तान
छुए मन के तार
सुधियाँ जागीं।
6
आयी है उषा
खेलती लाल गेंद
औचक मन।
7
शशि -किरण
सद्यः स्नाता हो जैसे
वसुधा प्यारी ।
-0-
Posted in डॉ.क्रान्तिकुमार | Tags: पूणे, भारत, महाराष्ट्र
Posted by: रामेश्रर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 26, 2012
मन -बंजारा
1-भावना सक्सेना
1
मन -बंजारा
भटके हर दिन
खोज खुशी की ।
2
शांत सड़क
खोयी -सी, ऊँची-नीची
जीवन सम ।
3
राही चलते
सड़क रह जाती
यही संसार ।
4
मन के पाखी
उड़ें अनियंत्रित
तन में कैद ।
5
धूप साँझ की
सींचती अन्तर्मन
यादें जीवन ।
6
आज का दिन
भरपूर खुशी थी
गुज़र गया।
7
कल आएगा
लेकर नव प्रात
धरो विश्वास
-0-
2-त्रिलोक सिंह ठकुरेला
1
दौड़ाती रही
आशाओं की कस्तूरी
जीवन भर ।
2
नयी भोर ने
पंख फड़फड़ाए
जागीं आशाएँ ।
3
देकर प्रेम
उसने पिला दिया
अमृत -घूँट ।
4
थका किसान
उतर आई साँझ
सहारा देने ।
5
तितली उड़ीं
बाल -मन में सजे
सपने कई
-0-
Posted in त्रिलोक सिंह ठकुरेला, भावना सक्सेना | Tags: आबू रोड, भारत, राजस्थान, सूरीनाम
Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 24, 2012
मेरे जज़्बात
हिंदी हाइकु परिवार के लिए वरिन्द्रजीत सिंह बरार एक नया नाम होगा |आपने पहली बार हाइकु लिखकर हिंदी साहित्य से लिखने का नाता जोड़ा है| यह हाइकु यादों का आईना पोस्ट से मुतअस्सिर ( प्रभावित) हो कर लिखे गए हैं | इन हाइकु में कुछ सवाल उभरकर सामने आए हैं , जिनका जवाब देने का मैंने प्रयास किया है यह सोचकर कि इससे पहली बार लिखने वाले का उत्साह बढ़ेगा | आशा करती हूँ कि उनका ये प्रयास आप सबको अच्छा लगेगा |
1.
सुलगे आज
मेरे सीने में आग
बताऊँ किसे ……..वरिन्द्रजीत बरार
भावों का ताप
शब्दों में ढलकर
बना ख़िताब ……..हरदीप
2.
कट रहा क्या 
यूँ मेरे अंदर से
मुझे न पता ……...वरिन्द्रजीत बरार
मचले भाव
तेरे मन में आज
हुआ बेहाल ……..हरदीप
3.
ये दिल कटा 
या थे मेरे जज़्बात
कभी न जाना …….वरिन्द्रजीत बरार
दिल में तेरे
उमड़े ये जज़्बात
खोल दे द्वार ……….हरदीप
Posted in वरिन्द्रजीत सिंह बरार | Tags: पंजाब, बरनाला, भारत
Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 23, 2012
हाइकु हो ना ?
1
गागर छोटी
भरूँ मैं तो सागर
हाइकु हो ना ?…….कमला निखुर्पा
नन्ही रचना
भावनाओं का सिंधु
हाइकु बनी ……….संगीता स्वरूप
2
बहती जाए
नयनों से नदियाँ
सागर हो क्या ?……..कमला निखुर्पा
आँख का पानी
नदिया बन बहा
सागर बना । …………….संगीता स्वरूप
3
महक उठा
मोरा माटी- सा तन
फुहार हो क्या ?……….कमला निखुर्पा
फुहार बन
मुझ पर बरसा
महका मन । …………….संगीता स्वरूप
4
डूब चली मैं
नेह- ज्वार उमड़ा
चन्दा हो क्या ?…………कमला निखुर्पा
स्नेहिल स्पर्श
शीतल चाँदनी- सा
ठंडक मिली । …………संगीता स्वरूप
5
तिरती जाऊँ
ज्यों लहरों पे नैया
खिवैया हो क्या ?………कमला निखुर्पा
खेवनहार तू
नैया पार लगाए
तैरती जाऊँ ।………….संगीता स्वरूप
6
तुमने छुआ
क्या से क्या बन चली
पारस हो क्या ?…………कमला निखुर्पा
तुम्हारा स्पर्श
कंचन बन गई
करिश्मा हुआ ॰…………..संगीता स्वरूप
7
कुछ यूँ लगा
उमंगित है मन
त्योहार हो क्या ?…………कमला निखुर्पा
तुम आए तो
सजा घर – आँगन
उत्सव आया । ………….संगीता स्वरूप
8
कौन हो तुम ?
कितने रंग तेरे ?
चितेरे हो क्या ?………….कमला निखुर्पा
मैं रंगहीन
पर रंग मित्र हैं
चित्रकार हूँ ……………..संगीता स्वरूप
9
जो भी हो तुम
हो जनमों के मीत
कह भी दो हाँ !…………..कमला निखुर्पा
जन्मांतर से
साथ मेरा तुम्हारा
कभी न छूटे ।……………संगीता स्वरूप
10
मैं नहीं बोली 
बोल पड़ी कविता
छंद ही हो ना ?…………..कमला निखुर्पा
छंदहीन हूँ
कहती हूँ भावों को
कविता ही हूँ ।…………….संगीता स्वरूप
Posted in कमला निखुर्पा, संगीता स्वरूप ‘गीत’ | Tags: देहरादून, भारत
Posted by: रामेश्रर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 21, 2012
तरु जो सीधा(चाणक्य नीति)
डॉ नूतन गैरोला
1
कडुवा सत्य
मित्रता में अकथ
स्वार्थ गहरा ।
2
विष न डंक
फुंकार हो फिर भी,
शक्ति का फन ।
3
तरु जो सीधा
कुल्हाड़ी का निशाना !
बनो चतुर !!
4
निर्भय बन
हो कार्य निष्पादित
अजय बनो ।
5
फैले सुगंध
हवा की दिशा पर,
यश चौदिशा ।
6
जन्म से नहीं
आचरण से व्यक्ति
बने महान ।
7
खोलो न भेद
विश्वसनीय को भी
हो कभी धोखा ।
8
भय भगाओ,
पास जब फटके
लड़ो व जीतो ।
9
माँ है महान
देवता न तुल्य है,
माँ से बढ़के ।
10
लाड हो पर
डाँट दो गलत पे
है ये भलाई ।
-0-
Posted in डॉ नूतन डिमरी गैरोला | Tags: देहरादून, भारत
Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 20, 2012
यादों का आईना
जब कोई हमसे बहुत दूर चला जाता है तो उसकी याद हमारे जीने का सहारा बन जाती है | मेरे पूजनीय पिता जी को हमसे बिछुड़े लगभग २० वर्ष हो गए हैं | आज जब सुबह केलेंडर देखा जो २० अप्रैल दिखा रहा था , उस पर नज़र जाते ही यादों के आईने में किसी की तस्वीर दिखने लगी …..वो थे मेरे पिता जी …….जिनका आज जन्म दिन है | पूजनीय पिता जी की स्मृति में कुछ हाइकु………..
1.

कौन कहता
साथ तुम नहीं हो
तुम यहीं हो
2.
तोतले दिन
जिस संग बिताए
यादों में आए
3.
यादों में आना
पीठ थपथपाना
लगे सुहाना
4.
चले गए यूँ
कोसों दूर हमसे
यादों में मिलें
5.
याद उनकी
हर पल है आती
बड़ा रुलाती
6.
याद तुम्हारी
थामती भंवर में
नाव जो डोले
–डॉ. हरदीप कौर सन्धु
Posted in डॉ.हरदीप संधु | Tags: आस्ट्रेलिया, सिडनी
Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 20, 2012
सींच दिया तुमने
ज्योत्स्ना शर्मा
1
अति पावन
प्यारा रूप प्रभु का
करूँ नमन ।
2
नन्हीं पलकें
स्वप्न कुछ बडे़ हों
आशा छलके ।
3
मैं बीज ही थी
सींच दिया तुमने
प्यार -दुलार ।
4
फूलों से पत्ते
कितना बतियाए
हवा बताए ।
5
पनघट जो ,
धूप में रीत गए
भर दूँ नए ।
6
जाते हो कान्हा ?
राधा से कर जाओ
आने का वादा ।
7
भरा उजाला
किरणें नेह की हैं
या पुष्प -माला ।
9
आशीष -वर्षा
खिले सब सुमन
धरा का जिया ।
10
सूरज तुम
चले अब किधर ?
पानी में घर !
-0-
Posted in डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा | Tags: गुजरात, वलसाड
श्रेणी
- 1-टिप्पणी के लिए सूचना
- 1.1-हाइकु :अनुभूति के सहज उन्मेष की कविता :डॉ सत्य भूषण वर्मा
- 1.2 हाइकु -रत्न सम्मान
- अंशु सिंह
- अनंत आलोक
- अनामिका शाक्य
- अनिरुद्ध सिंह सेंगर
- अमर साहनी
- अरुण कुमार रुहेला
- अशोक आनन
- आर0पी0 शुक्ला
- आलोकेश्वर चबडाल
- इदराक खान
- इन्दु गुप्ता
- इन्दु रवि सिंह
- ईशा रोहतगी
- उमेश महादोषी
- उमेश मोहन धवन
- उर्मि चक्रवर्ती
- उर्मिला कौल
- उषा अग्रवाल ‘पारस’
- एन एल गोसाईं
- ओम पुरोहित 'कागद'
- कमल कपूर
- कमला निखुर्पा
- कुसुम गोयनका
- कृष्ण कुमार तिवारी 'किशन'
- कृष्णकुमार यादव
- कृष्णा वर्मा
- के जी बालकृष्ण पिल्लै
- के0 एल0 दिवान
- केशव शरण
- गिरीश पंकज
- गोपाल दास ‘नीरज’
- चेतन दुबे ‘अनिल’
- जया नर्गिस
- जितेन्द्र ‘जौहर’
- ज्योतिर्मयी पन्त
- डॉ गोपाल बाबू शर्मा
- डॉ जेन्नी शबनम
- डॉ नूतन डिमरी गैरोला
- डॉ पुरुषोत्तन दुबे
- डॉ बाल कृष्ण पाण्डेय
- डॉ भावना कुँअर
- डॉ मिथिलेश दीक्षित
- डॉ मिथिलेशकुमारी मिश्र
- डॉ रमा द्विवेदी
- डॉ रमाकान्त श्रीवास्तव
- डॉ रागिनी प्रताप
- डॉ राज कुमारी शर्मा ‘राज़
- डॉ विद्या बिन्दु सिंह
- डॉ शैल रस्तोगी
- डॉ श्याम सुन्दर ‘दीप्ति’
- डॉ सतीश दुबे
- डॉ सरस्वती माथुर
- डॉ सुधा गुप्ता
- डॉ सुरेन्द्र वर्मा
- डॉ. उदयभानु ‘हंस’
- डॉ. कुँअर बेचैन
- डॉ.अनीता कपूर
- डॉ.अमिता कौण्डल
- डॉ.अमिता दुबे
- डॉ.अरुणा दुबलिश
- डॉ.अर्पिता अग्रवाल
- डॉ.आदित्य प्रचण्डिया
- डॉ.आनन्द प्रकाश शाक्य
- डॉ.उर्मिला अग्रवाल
- डॉ.ओमप्रकाश सिंह
- डॉ.कमल किशोर गोयनका
- डॉ.करुणेश प्रकाश
- डॉ.क्रान्तिकुमार
- डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
- डॉ.डंडा लखनवी
- डॉ.पूनम मित्तल
- डॉ.भगवत शरण अग्रवाल
- डॉ.माधव पण्डित
- डॉ.मिर्ज़ा हसन नासिर
- डॉ.मीना अग्रवाल
- डॉ.रमेश कुमार त्रिपाठी
- डॉ.संदीप चौहान
- डॉ.सतीशराज पुष्करणा
- डॉ.सारिका मुकेश
- डॉ.सुरेश उजाला
- डॉ.हरदीप संधु
- डॉ.ॠतु पल्लवी
- डॉ0सावित्री डागा
- डॊ.टी. एस. दराल
- तु'हिना'
- त्रिलोक सिंह ठकुरेला
- दिलबाग विर्क
- दिलीप भाटिया
- दीपावली हाइकु विशेषांक-1
- दीपावली हाइकु विशेषांक-2
- दीपिका रानी
- देवी नागरानी
- देवेन्द्र पाण्डेय
- धन सिंह खोबा ‘सुधाकर’
- धूप के खरगोश
- नमिता राकेश
- नवल किशोर नवल
- नवीन चतुर्वेदी
- नवीन सी चतुर्वेदी
- नागेश भोजने
- निर्मला कपिला
- नीलमेन्दु सागर
- नीलू गुप्ता
- पुष्पा जमुआर
- पुष्पा रघु
- पूर्णिमा वर्मन
- प्रताप सिंह सोढ़ी
- प्रमिला भार्गव
- प्रियंका गुप्ता
- प्रोफ़ेसर दवेन्द्र कौर सिधु
- भावना सक्सेना
- मंजु गुप्ता
- मंजु मिश्रा
- मनोज भारती
- ममता किरण
- महत्त्वपूर्ण संग्रह
- मानोशी चटर्जी
- मीनाक्षी जिजीविषा
- मीरा ठाकुर
- मीरा भारद्वाज
- मुमताज़- टी एच खान
- मृत्युञ्जय पोखरियाल 'हिमांशु'
- यतीश चतुर्वेदी
- रचना श्रीवास्तव
- रत्नाकर त्रिपाठी
- रमेश कुमार
- रमेश चन्द्र श्रीवास्तव
- राकेश ‘नमित’
- राजकुमार ‘प्रेमी’
- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
- राजेन्द्र परदेसी
- राजेन्द्र मोहन त्रिवेदी ‘बन्धु’
- राजेन्द्र वर्मा
- राजेश बिस्सा
- राधेश्याम
- रामनारायण ‘रमण’
- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
- रेखा राजवंशी
- रेखा रोहतगी
- रेणु चन्द्रा माथुर
- रेनू चौहान
- लक्ष्मीशंकर बाजपेयी
- ललित मावर
- लाल बिहारी लाल
- लावण्या
- वरिन्द्रजीत सिंह बरार
- वर्ष गाँठ
- वीरेन्द्र कुमार भारद्वाज
- शम्भुशरण द्विवेदी ‘बन्धु
- शशांक मिश्र ‘भारती’
- शशि पुरवार
- शिव शरण सिंह चौहान ‘‘अंशुमाली’’
- श्याम खरे
- श्याम सुन्दर अग्रवाल
- संकल्प शर्मा
- संगीता स्वरूप ‘गीत’
- समीक्षायण
- सहयात्री
- सीमा स्मृति
- सुदर्शन रत्नाकर
- सुनील गज्जानी
- सुप्रीत संधु
- सुभाष चंद
- सुभाष नीरव
- सुमित प्रताप सिंह
- सुरेश कुमार चौधरी
- सुरेश यादव
- सुशीला शिवराण
- सूर्यदेव पाठक ‘पराग’
- सोनल रस्तोगी
- स्वरूपा राय
- स्वाति भालोटिया
- हरेराम समीप
- हाइकु क्या है ?
- हारून रशीद ‘अश्क’
- होली के रंग
- ॠता शेखर 'मधु'









































































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