Posted by: रामेश्रर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 29, 2012

इंतजार

सीमा स्मृति

1

तपते दिन

और बेचैन रातें

तन्हा सफर ।

2

थमें या बहें

पलकों पर रुके  

अश्क ये कहें ।

3

टूटे ये तार

हैं जख्मी अख्तियार

सोखते रस ।

4

तन्हा  राह में

टिमटिमता दीया 

करे सवाल ।

5

समय -सीमा

टिकटिक करती

न करे प्रश्न ।

6

रगों का लहू

दिल की धड़कन

 ये सरगम ।   

7

घिरी तन्हाई            

खामोशी पथराई

जड़ हो गए।

8

टूटी टहनी

बिखर गए पात

कहें  कहानी । 

 -0-


Responses

  1. थमें या बहें
    पलकों पर रुके
    अश्क ये कहें ।

    सुंदर हाइकु…सभी हाइकु बहुत सारगर्भित हैं…बधाई|

  2. सुंदर हाइकु रचनाएँ …

  3. थमें या बहें
    पलकों पर रुके
    अश्क ये कहें

    अति सुंदर !! बहुत ख़ूबसूरत सा ख़याल… अश्कों का सवाल…. मन को छू जाती हैं सीमा जी की रचनाएँ…
    मंजु

  4. sabhi haiku bahut hi sunder hain ek se badhkar ek badhai,
    saadar,
    amita


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