Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 26, 2012

सदी के प्रथम दशक का हिन्दी हाइकु -काव्य-2

डॉ उदयभानु हंस-जन्म 2अगस्त , 1926 , दायरा दीन पनाह (पाकिस्तान), हरियाणा सरकार द्वारा’राज्यकवि सम्मान’ के साथ ही देश के कई सम्मानों एवं पुरस्कारों से सम्मानित । सम्प्रति हिसार  में निवास ।

आज की हिन्दी हाइकु की पोस्ट में  डॉ उदयभानु हंस और उर्मिला कौल के चुने हुए हाइकु हमारे सहृदय पाठकों को ज़रूर पसन्द आएँगे ।

डॉ हरदीप कौर सन्धु और रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

डॉ उदयभानु हंस

1

ताजमहल-

गुलमोहर पर

ओस की बूँद

2

वर्षा की बूँदें

टूटकर बिखरे

माला के मोती

3

दूज का चाँद

विधवा के हाथ की

ज्यों टूटी चूड़ी

4

रात चाँदनी

गगन से बरसे

बेला के फूल

5

प्रकृति रानी

भू पर लहराती

चूनर धानी।

6

सान्ध्य आकाश

श्यामा के होंठों पर

खिले पलाश

7

प्रीत की रीत

उल्लास के सुरों में

पीड़ा का गीत

-0-


Responses

  1. बहुत सुंदर …

  2. प्रीत की रीत
    उल्लास के सुरों में
    पीड़ा का गीत …

    Bahut bhavpurn haiku hai …rachnakaar ko bahut2 badhai…

  3. प्रीत की रीत
    उल्लास के सुरों में
    पीड़ा का गीत …

    बहुत ही भावपूर्ण …बहुत बहुत बधाई|

  4. प्रीत की रीत
    उल्लास के सुरों में
    पीड़ा का गीत ।

    जीवन का सत्‍य । बहुत सुन्‍दर रचना ।

  5. आपकी सक्रियता से हम सब खुश हैं भावना जी !!

  6. प्रीत की रीत
    उल्लास के सुरों में
    पीड़ा का गीत
    बहुत ही सुन्दर हाइकु….बहुत बधाई।


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