Posted by: रामेश्रर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 8, 2011
माँ-2
तौल सके जो
समझ आई
माँ का दुलार
असहाय माँ
जो लुट गई
प्यारी बिटिया,
पराई हुई
सारा हुनर
माँ का अँचरा
माँ का कहना
माँ की दुनिया
1
कवच मेरा।
होती नहीं माँ
माँ की दुआ से
स्वर्ग है कहीं ?
माँ जो कलपे
रहेंगे ॠणी
Posted in कृष्णकुमार यादव, डॉ जेन्नी शबनम, डॉ मिथिलेश दीक्षित, डॉ रमा द्विवेदी, डॉ.सतीशराज पुष्करणा, डॉ.हरदीप संधु, सुदर्शन रत्नाकर, सुभाष नीरव | टैग: विश्व
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बाती -सी जली
हर दिन-रात को
हमारी माँ थी ।
khoobsoorat haaiku
By: dilbag virk on मई 8, 2011
at 2:17 पूर्वाह्न
sare haiku sanjo ken rakhne yogya .ek garnth se lag rahe hain
itne sunder sangrah ke liye bhai himanhu ji ko aur hardeep ji ko bahut bahut badhai ho
rachana
By: rachana on मई 8, 2011
at 3:13 पूर्वाह्न
हाइकु के जरिये ‘माँ’ को याद करते इन सभी रचनाकारों को मेरा नमन ! माँ पर बहुत ही भावपूर्ण और मन को छूने वाले हाइकु आपने प्रस्तुत किये हैं, आपको बहुत बहुत बधाई और रचनाकारों को भी!
By: सुभाष नीरव on मई 8, 2011
at 4:02 पूर्वाह्न
सभी रचनाकरों के हाइकु बहुत सुन्दर व सार्थक हैं..सभी को हमारी मंगलकामनाएं व सभी मां ओं को शत-शत नमन …
By: ramadwivedi on मई 8, 2011
at 4:06 पूर्वाह्न
janani praan …../jab bulaya……/ khansti rahi…./mamta bante…../ye haiku aaj ke parivesh me MA ki yathharthh sthiti ka chitran karte hein. sabhi haiku bahut achchhe evam marmsparshi hain.mujhe shamil karne ke liye Hardeep jiee aur Himaanshu jee ko hardik dhanyavaad!
By: Rekha Rohatgi on मई 8, 2011
at 2:00 अपराह्न
mere haaiku ko yahan sthaan dene keliye aadarniya Hardeep ji aur aadarniy Kamboj bhai ka tahedil se shukriya. sabhi haaiku bahut hin achhe lage. sabhi ko badhai aur shubhkaamnaayen.
By: jenny shabnam on मई 8, 2011
at 4:12 अपराह्न
mujhe yahan sthaan dene ke liye aadarniya Hardeep ji aur aadarniy Kaamboj bhai ka tahedil se shukriya. sabhi ke haiku padhe, sabhi bahut achhe lage. sabhi ko badhai aur shubhkaamnaayen.
By: jenny shabnam on मई 8, 2011
at 5:24 अपराह्न
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माँ पर हाइकु. माँ पर हाइकु*******1. तौल सके जोनहीं कोई तराजूमाँ की ममता!2. समझ आईजब खुद ने पाईमाँ की वेदना!3. माँ का दुलारनहीं है कोई मोलहै अनमोल!4. असहाय माँकह न पाई व्यथाकोख़ उजड़ी!5. …
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लगता है उस मैतर को ब्लॉक कर दिया है ।
काम्बोज
भाई साहब किसी ने लगता है आपको डॉ जेन्नी शबनम के हाइकु भेजे हैं पर वह पेज नज़र नहीं आ रहा है ।ये हिन्दी हाइकु पर छप चुके हैं ।कहीं किसी चोर कवि ने दूसरे नाम से तो नहीं भेज दिए होंगे । आप उनका नाम बताने की मेहरबानी करेंगे ।चुराकर बोली में बदले हाइकु ये हैं जो आपके ब्लाग पर अब नज़र नहीं आ रहे हैं- -तौल सके जोनहीं कोई तराजूमाँ की ममता!2. समझ आईजब खुद ने पाईमाँ की वेदना!3. माँ का दुलारनहीं है कोई मोलहै अनमोल!4. असहाय माँकह न पाई व्यथाकोख़ उजड़ी!5.
आपका
रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
rdkamboj@gmail.com
हिन्दी हाइकु से डॉ जेन्नी शबनम के हाइकु किसी चोर लेखक ने अनुवाद करके http://www.apnablog.co.in/entertainment भेजे थे , जो अब वहा नज़र नहीं आ रहे हैं।
By: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' on मई 10, 2011
at 2:18 अपराह्न
माँ को माँ के प्यार को समर्पित सभी हाइकु बहुत सुंदर हैं इस ग्रन्थ को सब संग बांटने के लिए रामेश्वर भाईसाहब और डॉ संधू को हार्दिक धन्यवाद.
सादर
अमिता
By: amita kaundal on मई 11, 2011
at 7:47 पूर्वाह्न
सभी रचनायें किसी अमूल्य खजाने से बढ़कर हैं. सभी की मेहनत को मेरा प्रणाम
By: उमेश मोहन धवन on मई 13, 2011
at 1:03 पूर्वाह्न