Posted by: रामेश्रर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 16, 2011
होली के रंग-1
1
रंग डगर
खुशबू का सफ़र
फिर शुरू है
2
तन फागुन
मन रंग-अबीर
मुग्धा अधीर
3
लाल गुलाल
पूरी देह पे लगा
हँसे पलाश
4
कूके कोकिल
फागुन पीटे ढोल
होली ठुमके
4
चैत जो आया
मटकी भर नशा
महुआ लाया
5
रंगों का मेला
सनकी चित्रकार
अकेला खेला
डॉ सुधा गुप्ता, मेरठ
1
रंग बरसे
पर मन तरसे
पिया बिदेस
2
जी में सवाल
गालोँ पर गुलाल
लगाये कौन
3
घर से दूर
यह पहली होली
मन अशांत
4
आया फागुन
तन में गुन गुन
महके मन
5
भंग का रंग
चढ़ा है चारों ओर
मन में उमंग
6
आ गयी होली
हर घर आंगन
सजी रंगोली
मंजु मिश्रा, कैलिफोर्निया
-0-
1
मन-मयूर
वसंत आगमन
देख नाचता ।
2
होली के संग
रंग-बिरंगे बन
भेद भूलते ।
3
कान्हा की वंशी
मीठे गीत सुनाए
मन को भाए ।
4
कान्हा की वंशी
होंठो को जो छू ले
राधा क्यूँ जले ।
प्रियंका गुप्ता, कानपुर
-0-
१.
होली का मौका
रंगों की बरसात
मित्रों का साथ
२.
फिर से उड़े
आसमान में रंग
हो गए दंग
३.
टेसू के फूल
भंग और ठंडाई
मुझको भाई
४.
ढोलक बजी
हर हथेली पर
मेंहदी रची
-रेखा राजवंशी,सिडनी ऑस्ट्रेलिया
फ़ौज़ी परिवार की होली
1
रंगीला पत्र
धुँधले थे अक्षर
फौजी के नाम
2
छुट्टी निरस्त
होली हुई बेरंग ,
सैनिक सोचे
3
बनाती होगी
रोते हुए गुझिया
प्रतीक्षा में माँ
4
सबसे छुपा
पोंछती होगी आँखें
इस होली माँ
5
उड़ेंगे रंग
बिना मेरे अँगना
होगी उदास
6
होली की शाम
देखता होगा राह
मेरा वो बेटा
7
लिये वो रंग
बैठा राह निहारे
फौजी का बेटा
8
होली की रात
भी ,चले यहाँ गोली -
सैनिक सोचे
9
रंग न संग
समझे कौन दर्द
हम फौजी का
-0-
रचना श्रीवास्तव,डैलस ,यू एस ए
1
होली के रंग
बिखेर रहे प्रेम
मनभावन
2
टेसू के फूल
छा गए चहुँओर
मौसम मस्त
3
रंग ही रंग
फैला चारों तरफ
अलबेला सा
4
भाँग की मस्ती
चढ़कर बोलती
आज होली है
5
चेहरों पर
अबीर व गुलाल
सबको भाए
6
विद्वेष भागे
भाईचारा पुकारे
लग लो गले।
-0-
कृष्ण कुमार यादव
भारतीय डाक सेवा,निदेशक डाक सेवाएँ
अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, पोर्टब्लेयर-744101
kkyadav.y@rediffmail.com
1
होली के रंग
पिया के बिना सभी
हैं बदरंग
2
मादल मौन
अपनों के बिना है
होली उदास
3
वो परदेस
कोयल की कुहुक
देती क्लेश
4
भेजी सुगन्ध
प्रेम का लिख दिया
है अनुबन्ध
5
सपना टूटा
रूठकर गया जो
फिर से रूठा
6
मन है रँगा
रंग गए ये प्राण
तेरे ही रंग
7
रंग तुम्हारा
उतरे, तभी चढ़े
होली का रंग
-0-
रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
Like this:
Be the first to like this post.
कूके कोकिल
फागुन पीटे ढोल
होली ठुमके
sudha ji kitna sunder manvikaran hai ati sunder
जी में सवाल
गालोँ पर गुलाल
लगाये कौन
3
घर से दूर
यह पहली होली
मन अशांत
apno se door aesa hi hota hai
कान्हा की वंशी
होंठो को जो छू ले
राधा क्यूँ जले ।
prem aur jalan sath sath chalte hain.sunder likha hai
टेसू के फूल
भंग और ठंडाई
मुझको भाई
४.
ढोलक बजी
हर हथेली पर
मेंहदी रची
sunder bhav
aap sabhi ko holi ki shubhkamnayen
rachana
By: rachana on मार्च 17, 2011
at 12:27 पूर्वाह्न
रंगों का मेला
सनकी चित्रकार
अकेला खेला
बहुत खूब…।
होली की सभी को ढेरों शुभकामनाएँ…।
By: Priyanka Gupta on मार्च 17, 2011
at 2:13 पूर्वाह्न
5
चेहरों पर
अबीर व गुलाल
सबको भाए
6
विद्वेष भागे
भाईचारा पुकारे
लग लो गले।
होली पर्व पर कृष्ण कुमार यादव जी ने अच्छा सन्देश दिया..लाजवाब हाइकू..बधाई.
By: Shahroz Anwari on मार्च 17, 2011
at 10:23 अपराह्न
हिमांशु जी , डा. हरदीप कौर जी, एवं सभी लेखकों को होली की सतरंगी शुभकामनाएं ….
सभी रचनाकारों के हाइकु बहुत सार्गर्भित व रंगीन पर्व के अनुकूल हैं सभी को इसके लिए बधाई । विशेष रूप से मै हिमांशु जी एवं डा. हरदीप कौर जी को धन्यवाद देना चाहती हूं क्योंकि एक स्थान पर चुन -चुन कर इतने रचनाकारों की रचनाओं को संजोया है …सुपर्व ,सार्थक प्रयास ।पुन: आभार….
By: Dr. Rama Dwivedi on मार्च 18, 2011
at 4:16 पूर्वाह्न
‘फ़ौजी परिवार की होली’ शीर्षक के सारे हाइकु पढ़ कर मन अनायास भर आया…। भावपूर्ण और खूबसूरत हाइकुओं के लिए मेरी बधाई…।
भेजी सुगन्ध
प्रेम का लिख दिया
है अनुबन्ध |
ऐसा प्यारा अनुबन्ध…मन को भा गया…।
आदरणीय काम्बोज जी को इतने अच्छे हाइकुओं के लिए बधाई…।
सभी को होली की बहुत शुभकामनाएँ…।
By: Priyanka Gupta on मार्च 18, 2011
at 3:08 अपराह्न
वसंत और होली के रंग क्या खूब खिले हैं… हाइकू का यह रंग-बिरंगा संग्रह पढ़ कर बहुत अच्छा लगा. सभी रचनाकारों को होली की हार्दिक शुभकामनायें
By: manju mishra on मार्च 20, 2011
at 12:12 अपराह्न
सात रंग …इंद्रधनुष के…
पर अनगिनत रंग हमारे हाइकु के…।
सभी हाइकुकारों को सतरंगी शुभकामनाएं…।
By: kamla nikhurpa on मार्च 20, 2011
at 9:44 अपराह्न
रंगों का मेला
सनकी चित्रकार
अकेला खेला
बहुत खूब…।
By: sunil gajjani on मार्च 22, 2011
at 8:55 अपराह्न